बांवळ्या, कुण रे लगायौ थारौ पेड़
बांवळ्या, कुण रे सपूती थानै सींचियौ
गोरी अे, सुसरौजी लगायौ म्हारौ पेड़
सासू सपूती म्हांनै सींचियौ...
बांवळ्या, कतरा वीघां में थारौ पेड़
बांवळ्या, कतरा वीघां में थारी छांवली
गोरी अे, बारै बीघां में म्हारौ पेड़
सोळै वीघां में म्हांरी छांवळी
बांवळ्या, कुण रे बैठैली थारी छांव
बांवळ्या, कुण रे सपूती कातै कातणौ
बांवळ्या, कुण रे सरीसौ थारौ फूल
बांवळ्यां, कुण रे सरीसी थारी पापड़ी
गोरी अे, सोनै सरीसौ म्हारौ फूल
रूपै सरीसी म्हारी पापड़ी
बांवळ्या, कठै रे मेलूं ली थारौ फूल
बांवळ्या, कठै रे मेलूं ली थारी पापड़ी
गोरी अे, पेयां मेलौ म्हारौ फूल
डाबा नै मेलौ म्हारी पापड़ी
बांवळ्या, अब की ओळंग सुसराजी नै मेल
बांवळ्या, अब को सियाळौ भेळौ काढस्यां
गोरी अे, सुसरौजी री जावै अे बलाय
म्हारै नै सरीसा कंवर घोड़ै चढै
बांवळ्या, अब की ओळंग जेठजी नै मेल
बांवळ्या, अब को उन्हाळौ भेळौ काढस्यां
गोरी अे, जेठजी री बड़का-बोली मार
ऊठ सवारै झगड़ौ बा करै
बांवळ्या, अब की ओळंग देवरिया नै मेल
बांवळ्या, अब की तीजां भेळी खेलस्यां
गोरी अे, देवरिया री भोळी-ढाळी नार
सांझ पड़्यां विलखी फिरै
बांवळ्या, अबकी ओळंग साथीड़ां नै मेल
बांवळ्या, अबकौ चौमासौ भेळौ काढस्यां
गोरी अे, साथीड़ां री आमी-सामी पोळ
ऊठ सवारै जाझा ओळभा
बांवळ्या, इतरा में थे ही पूत सपूत
बांवळ्या, ऊभी छोडी रंग म्हैल में
गोरी अे, इतरा में म्हे ही अे सपूत
म्हे ही सजावां राजाजी री चाकरी