दमँगल विच अ - पचो दियण, वीर धणी रो धान।
जीवण - धण वाल्हा जिकां, छोड़ो जहर समान॥
वीर स्वामी का अन्न युध्द के बिना नही पचा करता। अतः जिन्हें जीवन और स्त्री प्रिय है वे उस अन्न को जहर के समान समझकर छोड़ दें अर्थात् वीर स्वामी के अनुचर को जान हथेली पर रखनी पड़ती है।