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अंजस सोशल मीडिया
ईस ! घणा जे आखता
सूर्यमल्ल मीसण
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ईस
!
घणा
जे
आखता,
तो
लीजै
सिर
तोड़।
धड़
अेकण
धण
रो
धणी,
पड़सी
वैर
वहोड़॥
स्रोत
पोथी
: वीर सतसई
,
सिरजक
: सूर्यमल्ल मीसण
,
संपादक
: नरोत्तमदास स्वामी, नरेन्द्र भानावत, लक्ष्मी कमल
,
प्रकाशक
: राजस्थानी ग्रन्थागार, जोधपुर
,
संस्करण
: प्रथम
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