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सुण हेली ! ढोलै
सूर्यमल्ल मीसण
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सुण
हेली
!
ढोलै,
लेणो
पड़वे
लोच।
कंत
सजंतां
सौ
गुणो,
कड़ी
वजंतां
कोच॥
स्रोत
पोथी
: वीर सतसई
,
सिरजक
: सूर्यमल्ल मीसण
,
संपादक
: नरोत्तमदास स्वामी, नरेन्द्र भानावत, लक्ष्मी कमल
,
प्रकाशक
: राजस्थानी ग्रन्थागार, जोधपुर
,
संस्करण
: प्रथम
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