पति पर दूहा

दूहा18

कंत! घरै किम आविया

सूर्यमल्ल मीसण

सुण हेली ! ढोलै

सूर्यमल्ल मीसण

छोड़ मरोड़, छिपा मती (बादळी)

चंद्र सिंह बिरकाळी

मोर मतना टहूक

बस्तीमल सोलंकी भीम

घणो आकरो सोगरो

आयुषी राखेचा

कथूं हियै रा भाव

नरपत आशिया "वैतालिक"

कै दीठो हय आंवतो

सूर्यमल्ल मीसण

सज धज आवै सामनै (बादळी)

चंद्र सिंह बिरकाळी

सिणगार रस रा दूहा

मान कँवर ‘मैना’

वीरांगणा रा उद्‌गार

मानसिंह शेखावत ‘मऊ’

प्रीतम रो मुख पेखतां (लू)

चंद्र सिंह बिरकाळी

पहरै वदळै वादळी (बादळी)

चंद्र सिंह बिरकाळी

पिचरंगी है पागड़ी

आयुषी राखेचा

प्रीतम भेजी वादळी (बादळी)

चंद्र सिंह बिरकाळी

चुप मत साधै वादळी (बादळी)

चंद्र सिंह बिरकाळी

जपत जपत जिव्हा थकी

आयुषी राखेचा