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साइट: परिचय
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अंजस सोशल मीडिया
रांडां मिली मंगल कीयौ
बखना जी
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रांडां
मिली
मंगल
कीयौ,
मुणस
नहीं
घर
मांहि।
करि
सिंगार
हंस्ती
फिरै,
रुली
विगूचै
कांहि॥
स्रोत
पोथी
: बखना जी की वाणी
,
सिरजक
: बखना जी
,
संपादक
: मंगलदास स्वामी
,
प्रकाशक
: लक्ष्मीराम ट्रस्ट, जयपुर
,
संस्करण
: प्रथम
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