पग पखीणौ हे सखी, दुई रसणां मुखि देख।

तसु रिप स्वामी सहज मैं, आवि मिल्यो मुहि लेख॥

स्रोत
  • पोथी : सोढ़ी नाथी रा गूढ़ार्थ ,
  • सिरजक : सोढ़ी नाथी ,
  • संपादक : दीनदयाल ओझा, भगवानदत्त गोस्वामी, जगदीश माथुर ,
  • प्रकाशक : हिन्दी विश्व भारती, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
जुड़्योड़ा विसै