दाणा काणा व्है रिया, गाणा में नंह राम।
नाणा दाणा दोयरी, राखो पत घनशाम॥
बिण बोल्या ही जाणले, चित्त वित्त री बात।
आंख्या बिना ही जीमतो, देखै सारी तात॥
सार हीन संसार में, दो बातां में सार।
समझ सोचनै चालणो, नाण दाण बेकार॥
खाद, बीज, पाणी मिलै, कृषक रमै नित पास।
चारूं रो जद मेळ व्है, निपजै मक्या खास॥
बाड़ खेत नै खायनी, खेत न खोवै बीज।
ऊंदर, बांदर, कागला, आगै सब ना चीज॥
सरग नरक भय मन बसै, ज्यांरै मन में चोर।
बणै भसम इण देहरी, सरग नरक इक ठौर॥
बण पिता दादो बणिया, पड़दादो परमाण।
बेटा, पोता, दोयता, मानो आप समान॥
राग राग री बात में, पावै तन बैराग।
जीरण बदळां वेश ज्यूं, मन बदळो बड़भाग॥
खोड्या, खोड़्या, खोड़ला, कागल कोचर काण।
प्यादा सूं फरजी बणै, टेढा टेढा जाण॥
भोळी भामण लायनै, मती सुणावो बैण।
लाल देत पुचकारतां, बणै दुधारू धेन॥