जात देव थे हो बड़ा, थांसू बडो न कोय।
थारै सरणै जो पड़ै, बाळ न बांको होय॥
जाति री महिमा घणी, अजब निराळी रीत।
दूजां सूं घिरणा करो, आपसरी में प्रीत॥
रोटी बेटी बोट रो, जाति में ब्यौवार।
दूजां री दरकार नीं, राजनीति रो सार॥
जात रामसा पीर री, घर बैठ्यां बोलाय।
वोटां सारू राजवी, जात पंचायत जाय॥
अेलम री कीमत नहीं, अठै पूजीजै बंस।
जात बणाद्यै कागलो, जात बणाद्यै हंस॥
बड जाति में जलमिया. करम भलांही खोट।
जाति सूं मोटा बजै, अक्कल भांऊ ठोट॥
का बिरखा सूं आवियो, का तोड़्यो पाताळ।
पाणी सारू भायला, क्यांरी जात झिकाळ॥
जद-जद चालै देस में, जात्यां रो भूचाळ।
भाईपै रै रूंख नै, पटक द्यै ऊछाळ॥