ठगां बणाई ठौड़, ऊछळ जग में ऊठमल।
दगो लगावै दौड़, हुंस्यो ओ हंसतो फरै॥
जोड़ सकै तो जोड़, कुरपण सूं कारी लगा।
ठिरग्या ठारी ठौड़, उफ नह काढ़ै ऊठमल॥
लगती पूळो देय, हाको कर हंसता फरै।
नेड़ो मतना जाय, ऊधम करसी ऊठमल॥
गळ बाहीं कर मेळ, हाथ जोड़ हांजी कहै।
खरची केरा खेल, ऊवो देखी ऊठमल॥
हांमी मांड मचांण, बाह्या बोलां रा तीर।
कर-कर खांचा तांण, ऊंडा खोदबा ऊठमल॥
भूलै भालो टेक, गुण कर थूं गाडो भर्या।
औ गण कर ले अेक ऊबो बाळै ऊठमल॥
हंसै, हंसावै देख, आंसू नह पूंछै अठै।
कर्यां भेड रा भेख, ऊठ चूंगट्यां ऊठमल॥
लिछमी राखै पोख, धनवतां रा दोख नै।
दीना रा दस दोख, ऊछाळै क्यूं ऊठमल॥
डांमां ऊपर डांम, चौरासी लागै घणा।
पाछी फेरै राम, ऊजड़ गेलां ऊठमल॥
ग्वाळां रो रखवाळ, कोनो दावानळ पिवै।
टीटोड़ी रा बाळ, ऊब उबारै ऊठमल॥