ईला में ममता अेक, मोटी मायड़ तणी।

दूजी मिलै कठै’क, प्रतख जोयि प्रहलादसी॥

स्रोत
  • पोथी : मायड़ रौ मोह ,
  • सिरजक : प्रह्लाद सिंह राजपुरोहित ,
  • प्रकाशक : अखेराजोत प्रकाशन धुनियाड़ी नागौर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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