धोळा बादळ डोलता, आभै भागम भाग।

ज्यूं धोबी रा घाट पर, उफणै सावण झाग॥

बिरथा कड़कै बादळो, पड़ै नीं बिरखा बूंन।

ज्यूं कदुवो बड़-बड़ करै, ङर में लूण नीं चून॥

बादळ डूंगर पर चढ़यो, धूंआं उगळतो ऊंट।

टीबै माथै चिलम ज्यूं बाबो खींचै घूंट॥

जाणो पड़सी पीरयै, तीजां रो त्यूंहार।

नीं चाऊं पण के करूं, बीरो कुद लणिहार॥

मूंडो देखण चिड़कली, बिरखा ढाबां जाय।

जियां गौरड़ी गांव री, पणघट घाटां जाय॥

बूंद ज्यूं छाणै चालणी कदै मूसल धार।

चिरत धरै, बाजा करै, सावण बदकार॥

मेह में भीजी बूडळी सूंवै दई फफेंड़।

डोलै सूको ढूंढती, ज्यूं कोड़ै में भेड़॥

बीजळ बादळ में लुकै, गौरी घूंघट गांव।

जोत रूप री नीं लुकै, लुकै नीं जोबन धाम॥

बाड़ पराई लांघती, यूं तोरूं री बेल।

छोड़ै कुल मरजाद सै, ज्यूं छोरी बिगड़ैल॥

बीजळ काळा मेघ में हंसै लुकै कर खील।

नठ खट नै छेड़ै, हंसै, राधा ओट करील॥

सावण हींडो झूलतो, सूणै पीव री बात।

कियां कटी मरवण बता, मैंदी भुजणी रात॥

नदी उतर डूंगर चली, यूं सांपण बळ खाय।

ज्यूं अल्हड़ देहात री, गांव सजन रै जाय॥

लागी सावण री झड़ी, रुक-रुक, थम बरसात।

ज्यूं साजन री सैज पर थम थम आवै याद॥

जहर उमर रो चढ़, बढ्यो, गावै बिरस राग।

जोबन झूलै गोरड़ी, ज्यूं पिरवा में नाम॥

घास पळकतो जैंगणो, हिवड़ै गौरी याद।

याद दिरावै देस री, बीजळ-बादळ साथ॥

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