ढोला आमण दूमणउ, नख ती खूदइ भीति।
हमथी कुण छइ आगळी, वसी तुहारइ चीति॥
भावार्थ:- हे ढोला! तुम उदास हो रहे हो, नखों से भींत खरोंच रहे हो। हमसे बढ़कर कौन है जो तुम्हारे चित में आ बसी है?