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दध सुत रिप घन ऊलटे
सोढी नाथी
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दध
सुत
रिप
घन
ऊलटे,
सारंग
घन
उमटाइ।
इम
बिरहन
बिलखी
भई,
सारंग
झरे
झरलाई॥
स्रोत
पोथी
: सोढ़ी नाथी रा गूढ़ार्थ
,
सिरजक
: सोढ़ी नाथी
,
संपादक
: दीनदयाल ओझा, भगवानदत्त गोस्वामी, जगदीश माथुर
,
प्रकाशक
: हिन्दी विश्व भारती, बीकानेर (राज.)
,
संस्करण
: प्रथम
जुड़्योड़ा विसै
बादळ
वियोग
आँसू