छह दर्शन हम बूझिया, जे होता वैरागि।

‘बखना’ चूलै कौनके, धूवां पाखै आगि॥

स्रोत
  • पोथी : बखना जी की वाणी ,
  • सिरजक : बखना जी ,
  • संपादक : मंगलदास स्वामी ,
  • प्रकाशक : लक्ष्मीराम ट्रस्ट, जयपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
जुड़्योड़ा विसै