पीउ चलो पदमिणी कहै, आयौ मगसिर मास।

चहुं दिसि सीत चमक्कियो, वाल्हा हियै विमास॥

ऊनवियो उतराध रो, पाळो पवन सूं जोय।

पोख मास में गोरड़ी, कदे छंडे कोय॥

माह महीनै सी पड़ै, इणि रिति चले बलाय।

ऊंडै पड़वै पोढियै, कामणि कंठ लगाय॥

फागुण मास बसंत रित, रीत सुणि भरतार।

परदेसां री चाकरी, जाइ कुण गमार॥

चतुर महीनें चेत रै, हुओ चलणहार।

तुंग कसै तुरियां तणां, साथीड़ां सिरदार॥

पिउ वैसाखे हालियो, सैणा सीख करेह।

ऊभी झूरै गोरड़ी, डब डब नैण भरेह॥

लू बाजै दिणयर तपै, मास अतारौ जेठ।

आंख्यां पावस उल्लस्यौ, ऊभी मेड़ी हेठ॥

पीउ मोसै परदेसड़ै, आयो मास असाढ़।

निसनेही परिहरि गयो, गोरी सूं करि गाढ॥

सैयां श्रावण आवियो, उमहिं आयो मेह।

चमकण लागी बीजळी, दाझण लागी देह॥

भाद्रवड़ौ भरि गाजियो, नदी खळक्या नीर।

बाबहियो पिउ पिउ करै, घरि नहिं नणदल वीर॥

आसू मास विदेस पीउ, विरह लगावै बाण।

सेजड़ियां विस घोळियां, मंदिर हूआ मसाण॥

काती कंत पधारिया, सीधा वंछित काज।

घरि दीपक उजवाळिया, गोरंगी जसराज॥

स्रोत
  • पोथी : जिनहर्ष ग्रंथावली ,
  • सिरजक : जिनहर्ष मुनि 'जसराज' ,
  • संपादक : अगरचंद नाहटा ,
  • प्रकाशक : सार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
जुड़्योड़ा विसै