इत दिल्लिय कनउज्ज उभय उरझे कछु कारन।
बिजयचन्द्र रठ्ठोर चढ्यो तोमर संहारन।
सोमेश्वर यह सुनत सज्जि दिल्लिय सहाय पर।
पहुंच्यो लै दल प्रचुर ताहि आवत सुनि तोमर।
संक्रमि अनंगपालहु समुख मिलि स्वगेह लैगो मुदित।
इक थाल बिरचि दुव नृप असन हुव प्रसन्न करि परमहित॥