गागरोणि अचलेस सजे गढ, रण बहु बरस किये रावण रढ।

असुचि मन्त्र दिल्लीस उपायो, बारि पटकि गोपल बिगड़ायो॥

स्रोत
  • पोथी : बलवद विलास ,
  • सिरजक : सूर्यमल्ल मीसण ,
  • संपादक : डॉ. चंद्रप्रकाश देवल ,
  • प्रकाशक : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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