डांडिया मारवाड़ क्षेत्र का लोकप्रिय नृत्य है। डांडिया नृत्य होली के दिनों में किया जाता है। गैर नृत्य की भांति इस नृत्य में भी हाथों में लम्बी छड़ियाँ लेकर वृत्ताकार नृत्य किया जाता है। इस नृत्य में वृत्त अथवा चौक के बीच में शहनाई और नगाड़ा वादक बैठते हैं, शहनाई-नगाड़े की धुन और लय पर ‘लोक-ख्याल’ गाती 20-25 पुरुषों की टोली डांडिया टकराते हुए नृत्य करती है, ‘लोक-गीतों’ में अधिकतर गीत बड़ली के भैंरुजी के गाये जाते हैं। डांडिया नृत्य में स्वांग भी धारण किए जाते हैं, जिनमें— राजा, रानी, श्रीराम, सीता, शिव, श्रीकृष्ण, सिन्धिन, बजिया, साधु आदि मुख्य हैं। जो व्यक्ति राजा बनता है, वह मारवाड़ नरेश की भांति पाग, तुर्रा, अंगरखा और पायजामा पहनता है। गैर, गींदड़ा और डांडिया तीनों नृत्यों में बहुत-सी समानताएं हैं। किन्तु पद संचालन, अंग भंगिमा, ताल, गीत एवं वेशभूषा से इनमें भेद समझा जा सकता है।