Tu Hi Tu Aadhar Hamare | Dadu Dayal Bhajan | Hullas Purohit | तू ही तू आधार हमारे | हुल्लास पुरोहित . तू ही तू आधार हमारे, सेवक सुत हम राम तुम्हारे संत दादू दयाल जी की पवित्र दादू वाणी से लिया गया एक भजन है, जिसे हुल्लास पुरोहित जी ने सच्ची श्रद्धा और सादगी के साथ गाया है। संत दादू दयाल जी राजस्थान के 16वीं सदी के संत कवि थे, जिनके शब्दों में एक ऐसी सरलता और गहराई है जो आज भी लोगों के दिल तक पहुँचती है। इस भजन का एक ही केंद्रीय भाव है। ईश्वर ही हमारा सच्चा सहारा है। वही हमारे माता-पिता हैं, वही हमारा परिवार है, वही हमारा रक्षक और मित्र है। जब जीवन में दुख, उलझन या कठिनाई आती है, तो केवल उनका नाम ही शक्ति देता है और आगे का रास्ता दिखाता है। यह केवल कविता नहीं है। यह कुछ पंक्तियों में एक पूर्ण समर्पण है। हुल्लास पुरोहित जी की प्रस्तुति मूल भजन की आत्मा के बहुत करीब रहती है। इसमें कोई अनावश्यक अलंकार नहीं है। शब्द खुद अपना काम करते हैं। . Tu Hi Tu Aadhar Hamare, Sewak Sut Hum Ram Tumhare is a bhajan from the sacred Dadu Vani of Sant Dadu Dayal Ji, sung with quiet devotion by Hullas Purohit Ji. Sant Dadu Dayal Ji was a 16th century saint poet from Rajasthan whose words carry a simplicity and depth that still reach people today. The bhajan carries one central thought. God alone is our true support. He is our parents, our family, our protector and our friend. When life brings grief, confusion or difficulty, it is only his name that gives strength and a way forward. This is not just poetry. It is a complete surrender in a few lines. Hullas Purohit Ji's rendering stays close to the spirit of the original. There is no unnecessary ornamentation. The words do the work. . Facebook: https://www.facebook.com/anjasrajasthani Instagram: https://www.instagram.com/anjasrajasthani/ Twitter: https://twitter.com/anjasrajasthani Literature Website: https://anjas.org/ Festival Website: https://anjasmahotsav.org/ ___________________________________________________________________________________ अंजस कांई? अंजस राजस्थान री कला, साहित्य अर संस्कृति रो कोस है जिणमें सामिल है— कविता, कथा, कहाणी, बातां, ख्यातां अर लोक रो फूटरापौ। आ खेचळ रेख्ता फाउंडेशन कीन्ही है। . अंजस रा अंग अबार इण खेचळ रा कैई न्यारा-न्यारा अंग है: जूनौ कोस: 13वीं सदी सूं ले’र 19वीं सदी रै लिखित साहित्य रो कोस। नूवौ कोस: सन् 1900 सूं आज तांई री लिख्योड़ै साहित्य रो कोस। वाचिक परंपरावां रो कोस जिण मांय सामिल रैसी लोक कथा, लोक गीत, औखाणा, संस्मरण इत्याद। अंजस महोत्सव: राजस्थानी भासा अर साहित्य रो वार्षिकोत्सव। भविख री बाट अंजस राजस्थानी भासा रो सगळा सूं लूंठो कोस बण’र त्यार होवैला अेड़ी आसा है। ओ कोस राजस्थानी पाठक वर्ग नै पूरै रूप सूं बिन्या कोई पैसां रै सब जिग्यां उपलब्ध रैवैला। आ खेचळ कितरी सारथक होवै इण बात री साख तो राजस्थानी रो आखौ पाठक वर्ग तै करेला, पण आपरी सिमरधता रै साथै जारी राजस्थानी रो पैलो उपक्रम है। . #dadudayal #hullaspurohit #bhajan #santvani #devotionalmusic #spiritualbhajan #hindibhajan #santmat #bhaktisangeet #indiandevotional