Mhara Juna Joshi Hariji Milan Kad Hosi | Hullas Purohit | म्हारा जूना जोशी हरिजी मिलण कद होसी

Mhara Juna Joshi Hariji Milan Kad Hosi | Hullas Purohit | म्हारा जूना जोशी हरिजी मिलण कद होसी हुल्लास पुरोहित राजस्थानी प्रभाती शैली में “म्हारा जूणा जोशी सांवरौ मिलन कद होसी” गाते हैं। यह भजन मीराबाई की भक्ति परंपरा से जुड़ा है और कृष्ण के लिए उठती तड़प और आस को सामने रखता है। इस भजन में विरह का भाव साफ़ सुनाई देता है। अलग होने की वह धीमी पीड़ा और अपने प्रिय से मिल जाने की चाह। धुन सरल रहती है, इसलिए शब्द सीधे दिल तक पहुँचते हैं। बोलों के बैठने में राजस्थान की लोक लय का रंग है। कुछ भी जल्दबाज़ी में नहीं लगता। माहौल शांत रहता है, जैसे सुबह की पहली प्रार्थना। Hullas Purohit sings Mhara Juna Joshi Sanwaro Milan Kad Hosi in a Rajasthani Prabhati style. It draws from Meerabai’s bhakti tradition and keeps the focus on longing for Krishna. The bhajan carries the feeling of virah. It is that quiet ache of being apart, and the need to meet the beloved. The melody stays simple, so the lines stay front and center. You can hear the Rajasthan folk cadence in the way the words sit on the tune. Nothing feels rushed. The mood stays calm, like early morning prayer. . Facebook: https://www.facebook.com/anjasrajasthani Instagram: https://www.instagram.com/anjasrajasthani/ Twitter: https://twitter.com/anjasrajasthani Literature Website: https://anjas.org/ Festival Website: https://anjasmahotsav.org/ ___________________________________________________________________________________ अंजस कांई? अंजस राजस्थान री कला, साहित्य अर संस्कृति रो कोस है जिणमें सामिल है— कविता, कथा, कहाणी, बातां, ख्यातां अर लोक रो फूटरापौ। आ खेचळ रेख्ता फाउंडेशन कीन्ही है। अंजस रा अंग अबार इण खेचळ रा कैई न्यारा-न्यारा अंग है: जूनौ कोस: 13वीं सदी सूं ले’र 19वीं सदी रै लिखित साहित्य रो कोस। नूवौ कोस: सन् 1900 सूं आज तांई री लिख्योड़ै साहित्य रो कोस। वाचिक परंपरावां रो कोस जिण मांय सामिल रैसी लोक कथा, लोक गीत, औखाणा, संस्मरण इत्याद। अंजस महोत्सव: राजस्थानी भासा अर साहित्य रो वार्षिकोत्सव। भविख री बाट अंजस राजस्थानी भासा रो सगळा सूं लूंठो कोस बण’र त्यार होवैला अेड़ी आसा है। ओ कोस राजस्थानी पाठक वर्ग नै पूरै रूप सूं बिन्या कोई पैसां रै सब जिग्यां उपलब्ध रैवैला। आ खेचळ कितरी सारथक होवै इण बात री साख तो राजस्थानी रो आखौ पाठक वर्ग तै करेला, पण आपरी सिमरधता रै साथै जारी राजस्थानी रो पैलो उपक्रम है। . #bhajan #devotionalmusic #krishnabhajan #meerabai #rajasthanifolk #prabhati #hullaspurohit #rajasthanibhajan #krishnadevotion #bhaktigeet