आदिवासी पर लेख
दलित-विमर्श की तरह ही
आदिवासी-विमर्श भी हिंदी साहित्य और कविता में गए कुछ दशकों में प्रमुखता से उभरा है। प्रस्तुत चयन आदिवासी समाज को आधार बनाने वाली कविताओं से किया गया है।
आदिवासी-विमर्श भी हिंदी साहित्य और कविता में गए कुछ दशकों में प्रमुखता से उभरा है। प्रस्तुत चयन आदिवासी समाज को आधार बनाने वाली कविताओं से किया गया है।
राजस्थान रौ भील आंदोलन भारतीय स्वाधीनता संग्राम रै इतिहास रौ अेक उपेक्षित पानौ। अेक भूली बिसरी घटना। पण अेक आदिवासी कौम जिण भांत संगठित होय’र निरंकुश सत्ता रौ मुकाबलौ कियौ, आ काबिले-तारीफ बात। मानगढ री भाखरी माथै गुरू गोविंद रै मेळै में सदीव रै ज्यूं
संसार री भासावां बोलियां रो सर्वेक्षण करणिया भासाविदां रो मानणो है कै आखै जगत मांय 7000 सूं बेसी बासावां बोलियां है, जिणां मांय सूं अेकलै अेसिया महाद्वीप मांय 2500 भासावां बोलियां है। संसार री भासावां रो अध्ययन करण आळी संस्था अेथनोलॉग (Ethnologue) मुजब
आई. अे. अेस री ट्रेनिंग रै बाद पैली पोस्टिंग अेस.डी.अेम. माउंट आबू रै रूप मांय मिली। पैली पोस्टिंग अर बा ई राजस्थान रै सुरग मांय, जठै माउंट आबू तो टूरिस्टां सूं भरयो रैवतो, पण आबू रोड (तहसील आबू रोड मांय है अर अेस.डी.अेम माउंट आबू) तो टूरिस्टां सूं भरयौ