मेवाड़ पर काव्य खंड

काव्य खंड3

पन्ना जद तक जीवती

रामसिंघ सोलंकी

सूर उग्यो अध रात

रामसिंघ सोलंकी

कित चाल्यो अध रात !

रामसिंह सोलंकी