मुझ बाळक पाळक माढ रुखाळक तूं जग भाळक रास रमैं।

हित खेतरपाळक ठौंब उजाळक पौच पँयाळक प्रात समै।

बिरदाळक बीह भुजाळक चोल धजा चिरताळक तुंग भमै।

अब आव उँताळक मेट जँजाळक मां ममताळक तार हमैं॥

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां रचियोड़ी ,
  • सिरजक : सुआसेवक कुलदीप चारण
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