मांगी मिळै न मौत, माल मिळै किम मांगियां।
निज करमां री नौत, चूक न किण री, चकरिया॥
भावार्थ:- हे चकरिया, माँगने पर तो मौत भी नहीं मिलती; फिर धन-संपत्ति तो माँगने पर कैसे मिलेगी? यह सब तो अपने कर्मों का ही फल है; इसमें किसी अन्य का दोष नहीं।