छळ-बळ भेद खरांस, गांव गळी में नाचर्यो।
राजनीत रो रास, मन सरसावै मोलका।
औगण भर्या कपूत, दसा बिगाड़ी देस री।
जण-जण मारै जूत, मायड़ रोवै, मोलका
कोयल ज्यूं कुरळाय, साथण चाली सासरै।
जीव ठिकाणै जाय, ममता कूकै, मोलका।
सज्जनता रो सांग, घर-घर मिलज्या घूमतो।
टूटै बेगी टांग, मोको पड़िया, मोलका।
मायड़ भासा मांय, ममता राखो मोकळी।
निज रो नेम निभाय, मानो सै नै, मोलका।