छळ-बळ भेद खरांस, गांव गळी में नाचर्‌यो।

राजनीत रो रास, मन सरसावै मोलका।

औगण भर्‌या कपूत, दसा बिगाड़ी देस री।

जण-जण मारै जूत, मायड़ रोवै, मोलका

कोयल ज्यूं कुरळाय, साथण चाली सासरै।

जीव ठिकाणै जाय, ममता कूकै, मोलका।

सज्जनता रो सांग, घर-घर मिलज्या घूमतो।

टूटै बेगी टांग, मोको पड़िया, मोलका।

मायड़ भासा मांय, ममता राखो मोकळी।

निज रो नेम निभाय, मानो सै नै, मोलका।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : उदयवीर शर्मा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-17
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