जोत रतन मांहे कोई, जागत जोगी जारै।

अवल जको अवधूत, भक्त सो ब्रह्मा बिचारै।

आसा तृष्णा जाळ, आत्मा पांचूं ठारै।

कूड़ा कांणा तीन, पाक जाक पौबारै।

मीठी बेरी साध, पीयै जुग समंदर खारै।

लालू गोबंद गाय, अणद हर करसी थारै।

स्रोत
  • पोथी : मरु-भारती ,
  • सिरजक : सूर्यशंकर पारीक ,
  • संपादक : डॉ. कन्हैयालाल सहल ,
  • प्रकाशक : बिड़ला एज्यूकेशन ट्रस्ट, पिलानी ,
  • संस्करण : जनवरी
जुड़्योड़ा विसै