लालच लोभ’र कूड़ी माया, जिण सूं तन मन छीजै।

भोसागर में बेड़ी भारी, किण बिध पार लंघीजै।

निरत करो निरगुण हुय हालो, सूरज जाप जपीजै।

हर सूं मीठा जुग सूं रूठा, पेम पियाला पीजै।

मान भरम भो हुय निरवाळा, धीरज ध्यान धरीजै।

अजरा सील जोग रा मारग, विष इमरत कर पीजै।

घट में सेवा दिल में पूजा, हिरदै राम रटीजै।

सास उसासां पलक पलक हर, सासा सिंवरण कीजै।

निंदिया नारी कळह कळपना, भांज भरम बस कीजै।

पाँचूं पकड़ केद में डारो, निरत नांव सूं कीजै।

गुरु परसाद भणै सिध लालू, इण बिध पार लंघीजै।

स्रोत
  • पोथी : मरु-भारती ,
  • सिरजक : सूर्यशंकर पारीक ,
  • संपादक : डॉ. कन्हैयालाल सहल ,
  • प्रकाशक : बिड़ला एज्यूकेशन ट्रस्ट, पिलानी ,
  • संस्करण : जनवरी
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