दुरबळ ऊपर दया करीजै, लीलै जीण मंडावो।

हस्ती चढो भावैं हिंवर सिंधारो, रूढ़ा रथ समदावो।

गढ़ बीकाणा भगवां नेजा, तम्बू लाल तणावो।

मारो मेछ मुलक सूं काढो, थळसर जोत जगावो।

आसण जोत सुवाई दीसै, गोरख गादी आवो।

बरसो अमीं भेष रै ऊपर, दूधां नदी चलावो।

आवंत हुई आप री धणियां, संतां घरे उमावो।

सोभा हुवै समदरां तांई, राजतणा परचावो।

नौ नाथां गुरु गोरख आवो, थळहर नाद बजावो।

गुरु परसाद भणै सिध लालू स्वामी सरण रखावो।

स्रोत
  • पोथी : मरु-भारती ,
  • सिरजक : सूर्यशंकर पारीक ,
  • संपादक : डॉ. कन्हैयालाल सहल ,
  • प्रकाशक : बिड़ला एज्यूकेशन ट्रस्ट, पिलानी ,
  • संस्करण : जनवरी
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