जोत खड़ी कर जमों जगावो, कूंडै बैसो कोरा।

जत बिन जोगण पाट बिराजै, डाकण बांधै डोरा।

बैकुंठां रा वास दूर हैं, बीच घणा है धोरा।

चढ़िया नर तो बेगा पुगैं, पेदां पड़सी फोड़ा।

असंग जुगां अजरायल मारग, देवी रा पंथ दोरा।

करड़ो पंथ कै’र कठिनाई, सिंवरै स्याम सजोरा।

नाचै कूदै जुग परचावै, ज्ञान कथैं नर कोरा।

का’न जती काया में जाग्या हद नंद है लाल किसोरा।

कर जोड़्यां सिध ‘लालू’ बोलैं, मैं चाकर राधोरा।

स्रोत
  • पोथी : मरु-भारती ,
  • सिरजक : सूर्यशंकर पारीक ,
  • संपादक : डॉ. कन्हैयालाल सहल ,
  • प्रकाशक : बिड़ला एज्यूकेशन ट्रस्ट, पिलानी ,
  • संस्करण : जनवरी
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