राजस्थानी सबदकोस

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ल रो राजस्थानी अर्थ

शब्दार्थ

  • नागरी वर्ण माला का अट्ठाईसवां वर्ण जिसका उच्चारण दंत स्थान है। इसके उच्चारण में संवार, नाद और घोष प्रयत्न लगते हैं। यह पार्श्विक, घोष, वर्त्स्य, अल्पप्राण है
शब्दभेद/रूपभेद : सं.पु.
  • इन्द्र,
  • चिह्न,
  • पैर। (एका.)
  • छंद शास्त्र में लघु मात्रा का संकेत। सं.स्त्री.--
  • पृथ्वी। (एका.)