शालिभद्र सूरि जूनै काल रा महताऊ कवेसरां मांय ठावी ठौड़ राखै। वां रो रच्योड़ौ ‘भरतेश्वर बाहुबली रास’ राजस्थानी भासा री सरूआती रचनावां में गिणीजै। इणरौ रचाव-बगत संवत 1241 मान्यौ जावै। इण रास री कथा जैन तीरथंकर राजा रिखभदेव रै बेटां भरत अर बाहुबली रै बिच्चै हुयै जुद्ध माथै आधारित है। शालिभद्र सूरि रै जलम-मिरतु बाबत घणी जाणकारी नीं मिलै पण वां रो रचाव-बगत तेरहवों सईको मान्यो जावै। इण रास रै टाळ शालिभद्र कैई दूजी रचनावां रो सिरजण कर्यो जिणमें ‘पंच पांडव रास’ अर ‘बुद्धिरास’ उल्लेखजोग है।