छोरु वीटी ज हुइ नारि घरपच्छोकड़ि राखे छीडी हियडइ समरि न कुल आचारो जणि वारितउ गामि म जाए जाणीउ धरमु म जीव विणासु कहिसि म कुणहनीय घरि गूझो मइ एकलउ मारगि जाए परि घरि गोठि किमइ म जाइसि सीखि म पिसुनपणु अनु चाडी वडां ऊतर किमइं न दीजइं विसहरु जातु पाय म चांपे