कवि लब्धोदय
जैन मुनि लब्धोदय, ‘पद्मिनी चरित्र चौपाई’ रा सिरजणहार।
जैन मुनि लब्धोदय, ‘पद्मिनी चरित्र चौपाई’ रा सिरजणहार।
अद्भुत जाणे अपछरा रे लाल
अलिमपति कूच करायो रे
आलिमपति महेलां आया रे
अणख बोल बीबी तणा
बैठो तखत पतिसाहो रे
चावो गढ़ चीतोड़ छै
दिन दिन हे सखि
दिन ऊग्या आलिम जागै रे
अेह बात सुणी आलिमपति
राणी हे सखि राणि हे अति हे सरूप
राणो हे सखि राणो हे अति रंढाल
सोना कलसे अति सौहै रे
तुम साहिब पदमणी परणी रे
विण पद्मणी सेजे पोढुं नहीं रे