कवित्त23 अंबह सींचि सयाण तुव मकरि धतूरहं खेद चक्खि पिक्खियोबन खिसत देखिण कर्महं दाउ डसण कसन कंचन सहिउ गुण पीत तन चुक्क दर्प्पण में धन देखि करि मूरिख लेण कहंति धर्म्मु धर्म्मु सबु जग कहत धर्मु न कोइ लहंति