दलपत विजय
तपागच्छीय जैन साधु। हिंदी रा विद्वान नवमीं सदी रा मानीया है पण वास्तविक समै सतरवीं सदी। रचित ग्रन्थ खुमाण रासौ में मेवाड़ रे बापा रावळ सूं लेय'र महाराणा राजसिंह तक रो वरणाव।
तपागच्छीय जैन साधु। हिंदी रा विद्वान नवमीं सदी रा मानीया है पण वास्तविक समै सतरवीं सदी। रचित ग्रन्थ खुमाण रासौ में मेवाड़ रे बापा रावळ सूं लेय'र महाराणा राजसिंह तक रो वरणाव।
असपति घड़ि विसमां वींदणी
चिहुं दिस चोरासी बाजार
चित्रकोट चउरासी सरें
दीसें ऊंचा बहु देहरा |
गोखें गोरी काढ्यां गातं
खड़ग युद्ध विसमों छें सही
लखमीवंत वसें सहु लोक
मलपें मयपत नारी जेम
मंडप चोबारा महिलात
मठ आसण अस्थळ पोसाळ
परवत ऊपर अती उतंग
पोरस तणो देखालिस तेज
तां लग केहा सूर सधीर
वांकी पोळ नें वांकी गळी
वावि कूप नें कुंड तळाव