छीहल
सेखावाटी खेतर रा अग्रवाळ जैन कवि।
सेखावाटी खेतर रा अग्रवाळ जैन कवि।
जूनै काल रा महताऊ जैन कवियां में छीहल रौ नांव घणै आदर साथै लियो जावै। वां सूं जुड़्योड़ी घणी जाणकारी नीं मिळै पण अैड़ो मान्यो जावै कै वै सेखावाटी खेतर रा अग्रवाळ जैन हा। वां रै पिता रौ नांव नाथूजी हो। छीहल मौकळी रचनावां रौ सिरजण कर्यो अर इणमें ‘पंच सहेली रा दूहा’, ‘बावनी’, ‘पंथी गीत’, ‘लघु वेली’, ‘आत्म प्रतिबोध जयमाळ’, ‘उदर गीत’ अर ‘वैराग्य गीत’ आद उल्लेखजोग है। छीहल री काव्य भासा मीठास सूं भर्योड़ी है अर इण माथै ब्रज अर अपभ्रंस रौ कीं असर देखण नै मिलै।