अंधारा कै खिलाफ बसंतः चितराम भोळावण चुळू में बसंत माथा पै बेवड़ो उठायां वा म्हारै कनै बेटी म्हूँ अर तू मून अर बाताँ फाणी-पाँच चुळू सांच सोच