वीनती हरि तुम्ह सूं मेरी। क्रिपा करौ हूं बारी फेरी॥

तन मन चित हरि तुम्ह सूं लावौ। महा परमसुख नैंन दिखावौ॥

रह्यौ निकट सोई बिधि कीजै। देखि देखि अंम्रित रस पीजै॥

भाव भगति रहै तुम्ह नेरा। चरन कवल तलि देहु बसेरा॥

गुर दादू किरपा थैं जीजै। टीला नैं हरि इतनौं कीजै॥

स्रोत
  • पोथी : संत टीला पदावली ,
  • सिरजक : संत टीला ,
  • संपादक : ब्रजेन्द्र कुमार सिंघल ,
  • प्रकाशक : प्रकाशन संस्थान, दरियागंज, नयी दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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