थारो मुख नीको है कै म्हारो राधे प्यारी॥
दर्पण हाथ लियो नंदनंदन, साची कहो ब्रखभान की दुलारी।
हम क्या कहें तुम ही क्यूं न देखो, हम गोरी तुम स्याम बिहारी।
हमारो बदन ज्यूं चंदा की उजियारी, तुम रो बदन जैसे रैन अंधियारी।
तुमरे सीस पर मुकुट बिराजे, हमरे सीस पर आप गिरधारी।
चंद्रसखी भज बालकृष्ण छवि, दोऊ ओर प्रीत बढी अति भारी।