धनि परमेसुर धनि परमेसुर। ब्रह्मा बिष्न किये जिनि ईस्वर॥
गैव मांहि थैं प्यंड उपाया। जीव दिया सब धंधै लाया॥
सिध साधिक कीये सब आप। लिपै नहीं ताहि पुंन्यं न पाप॥
चंद सूर दोइ दीपक लाया। धरनि गगन जिनि पवन चलाया॥
नांनां भेख बरन बहु कीन्हां। करि प्रतिपाल सबै सुख दीन्हां॥
गुर दादू किरपा थैं सूझै। टीला हरि गुण बिरला बूझै॥