पियाजी आइ मिलउ इक वेर।

चरण-कमल की खिजमति करिहुं, होइ रहुंगी जेर॥

आइ छुरावउ अपणी प्यारी, मदन लई हइ घेरि।

आण तुम्हारी सिरपरि धरिहुं, ज्युं मालामाल मेर॥

मो वपरि कुं काहे मारण, झाली हइ समसेर।

कहइ राजुल जिनहरख विरहिणी, चिहुं दिसी रही मग हेर॥

स्रोत
  • पोथी : जिनहर्ष ग्रंथावली ,
  • सिरजक : जिनहर्ष मुनि 'जसराज' ,
  • संपादक : अगरचंद नाहटा ,
  • प्रकाशक : सार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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