पियाजी आइ मिलउ इक वेर।
चरण-कमल की खिजमति करिहुं, होइ रहुंगी जेर॥
आइ छुरावउ अपणी प्यारी, मदन लई हइ घेरि।
आण तुम्हारी सिरपरि धरिहुं, ज्युं मालामाल मेर॥
मो वपरि कुं काहे मारण, झाली हइ समसेर।
कहइ राजुल जिनहरख विरहिणी, चिहुं दिसी रही मग हेर॥