पहिले व्यांइति व्याइ गाई, कोण दुहै कोण मेलण जाई॥
लातां मारे बांटो खाइ, जाका बाछा बडी बलाइ॥
काजल पीपल वरण अवरणी, तीनि लोक मैं फिरि फिरि चरणीं॥
वनि वनि फिरै समंदि जल पीवे, धरणी गगन में पल फिरि आवे॥
अमृत सरवे भूखां मरती, धाई फिरै मछरका करती॥
घेरि घेरि के करुं उपाइ, तो मारगि छाड़ि कुमारगि जाइ॥