मो पइ कठिन वियोग की, सही जात न पीर।
सखी री कोइ उपाय हइ, धरीये मन धीर॥
भूख पिपासा सब गई, भयउ सिथल सरीर।
विरह घाउ हियरउ फटइ, जइसइं जूनउ चीर॥
हुं विरहिणि परवसि भई, जरी पेम जंजीर।
राजुल जिनहरख मिले, भयउ सुख सुं सीर॥