कै मैं भूखा विप्र उठाया, अनदोसां दोस लगाया
कै मैं कुल की लाज किन्हीं, दुर्बल कूं दान न दीना
कै मैं चरती गो बिडारी, क्या मैं क्वांरी कन्या मारी
कै मैं सासु-नणंद संताई, कै मैं पुत्र विछोया माई
ठोकर सूं गऊ उठायी, कै मैं चुगली किसी की खायी
कै मैं काटी वरत कुवा तणि, यो पाप कमायो पापणि
दिवला सूं दिवलो जोयो, पगला सूं पगलो धोयो
कै मैं आलो पीपल तोड़्यो, उपळा सूं उपळो फोड़्यो
पापां री करी कमाई, जासूं वर सिसपाळो आयी
कै मैं वाड़ी को फळ तोड़्यो, कै मैं झूठी निंदा जोड़ी
कै मैं पाड़ोसण भरमायी, कै मैं मार्यो सगो जंवाई
कै मैं चरती गऊ बतायी, पीता की काण न खायी
ठोकर सूं कांसो उठायो, कै मैं तीरथ अेक न न्हायो
कै मैं माता पिता संतायी, कन्या को द्रब ले खायी
अैसें पदम भणै जदुराई ! अंतरजामी ! करो सहाई