मन मांनि रे मर्यो,
मान को प्रयान आन कान में पर्यो॥
मन मांनि रे मर्यो,
मान को प्रयान आन कान में पर्यो॥
रेत रेत रेत में परेत सो पर्यो।
स्याम बार सेत व्है सचेत सो कर्यो॥
काल है, अंदेस नां संदेस औ कर्यो।
देस तैं बिदेस वास त्रास तैं डर्यो॥
काल हैं कराल ओ कराल भाभर्यो।
दूसरे मरे विहाल हाल हूं ढर्यो॥
यादि तैं सुकात गात जात जी जर्यो।
पाहि मां अचाहि आहि आपनां मर्यो॥
हो गरीब हो गरीब हीय तैं हर्यो।
काल को गरीब कों करीब नां कर्यो॥
धींग तैं अधीन व्है सुदीन नां धर्यो।
दीन साथ दीन व्है सुदीन तैं दर्यो॥
देख काल दीन कौं अदीन को डर्यो।
नाम हीं गरीब के निवाज को धर्यो॥
कोन कोन गोन या जिहांन नां कर्यो।
आपनी चलाय कोन कोन य्हां अर्यो॥
देख कोन कालचक्र चालनां दर्यो।
कोर कोर खून चून चूनसो कर्यो॥
धारिकै बिचार काल गाल में धर्यो।
पांन के बघूर जान पान सो पर्यो॥
धाय कैं भृसंसनीय धामतैं धर्यो।
काम तैं प्रसंसनीय काम नां कर्यो॥
धेय को विधान साधि ध्यांन नां धर्यो।
गेय को अग्यान तैं प्रमान नां पर्यो॥
क्रेय ओ बिक्रेय कथा काज तैं कर्यो।
श्रेय को विश्रेय साज लाज नां मर्यो॥
स्वांत को सुसांति सांति सोवनो कर्यो।
धोवनो न कीन ताहि रोवनो पर्यो॥
काम को अराम जाम जाम में कर्यो।
राम हैं कहैं नहीं बिराम नां कर्यो॥
गाम गाम ग्राम मैं कुनाम तैं कर्यो।
नाम को बिदाम साथ धान नां धर्यो॥
और को भलो निहारि रोकिबे अर्यो।
आपनूं बुरो बिहार डोकिबे डर्यो॥
और जो बुरे भले प्रबाह का पर्यो।
तू न क्यूं भलो बनैं भलो भलो भर्यो॥
भार ओर मार सार सास्त्र को भर्यो।
आप नहीं मार सूई पार नां पर्यो॥
धूत ओर को निहारि चोरि कैं धर्यो।
सूचिका प्रदान भू विमान कों वर्यो॥
सांम में बिश्राम में तमाम सूं डर्यो।
दीह में हराम क्यूं न राम सूं डर्यो॥
कामनीं सदोख जानि पोख तैं कर्यो।
मोख को अदोख मानि तोख नां तर्यो॥
भोगबे कूं जून खून गूंन तैं भर्यो।
काम चून को न रोट लूंन को कर्यो॥
धर्म को सुधार हो सु धार में धर्यो।
आपनो उधार सौ उधार में अर्यो॥
बारलो असेस सोध बोध तैं कर्यो।
सोधनां विसेस मांहिं सोध नां कर्यो॥
काम क्रोध लोभ मोह पास में पर्यो।
आस को बिनासकैं निरास नां अर्यो॥
गर्ब में अखर्ब खर्ब गर्ब नां गर्यो।
पर्ब में विपर्ब पर्व बास नां भर्यो॥
थान को कुथान थान मान नीसर्यो।
हीय सो सुथान हा विहान बीसर्यो॥
हूं जहां अरामखोर तूं जहां तर्यो।
तूहिं पार तार मार पाव में पर्यो॥
हैं बुरे मदीय सो कबूल में कर्यो।
अच्छ हैं त्वदीय अच्छ लच्छ में लर्यो॥
पार या संसार को बिचार नां कर्यो।
वार पार वारतें निसार नां कर्यो॥
ऊमरा असार मांहिं सार का धर्यो।
राम नाम सार है असार सो सर्यो॥