क्यूंन्हैं नींदौ म्हांनैं रे। थांकौ कीयौ थांनैं रे॥
साहिब सूं मन लायौ रे। टूकौ पांणीं खायौ रे॥
छाजन रांम खंदायौ रे। सो म्हे अंगि लगायौ रे॥
कुल क्रंम कोइ न कमायौ रे। कोइ खोसि न खायौ रे॥
न्यंदक कहै अबिचारी रे। टीला मांथै मारी रे॥