बैठा स्याम सिंघासण ऊपर कंवर कलेवै आया

कनक थाळ बहु भोजन लेकर कामण मंगळ गाया

लाडू जळेबी घेवर खाजा भोजन वेग करावो

जबै किसनजी हाथ न घालै रुकम कंवर नै लावो

रुकमकंवर नै आण बिठाया जीमै त्रिभुवनराई

पूरण ब्रह्मा पदम के स्वामी विध सूं जान जिमायी

स्रोत
  • पोथी : रुक्मिणी मंगळ ,
  • सिरजक : पदम भगत ,
  • संपादक : सत्यनारायण स्वामी ,
  • प्रकाशक : भुवन वाणी ट्रस्ट, लखनऊ -226020 ,
  • संस्करण : प्रथम
जुड़्योड़ा विसै