अंबिका पूजबा कंवरी चाली
उमा री भेंट पकवान श्रीफळ लियां
वस्त्र भर मोतियां साज थाळी
भवन री पोळ पर आय ठाढी भयी
च्यार लाख संग लयी सुहड़ आली
चहूं दिस झांकती अग्र नै चालती।
चतर नार पिया पंथ हाली
भामण्यां में मिली दामणी दीप देख
देख श्रीकृष्ण मोहिबा चाली
मंगळाचार ऊचार सखियां कियो
भेरियां तुरी नीसाण वाजै
मिली दुज-नार गुर-नार पुर-नार जुत
हरख ऊछाह मन मांह भारी
आपणा धाम सूं निकस आवत भयी
कंवरि का संग की करत त्यारी
सुवा तणा वदन इम नासिका पेखियै
इंद्र अैरावती चाल चोरी
ढेलणी नागणी भणिजियै ओपमा
केहरी लंक कटि लाय गोरी
सिरीफळ सारिखा उरज, हिवड़ै लसी
सोवनी कंचुकी, चीर झीणो
केस मोती पुया मांग कूंकूं भरी
भाल पर सोहवै दीप वैणो
पहर पट्टोलणी हीर री चोलणी
नार रै लोयणां मिरग हारी
रतन मयि राखड़ी वेणि वासग वणी
वाहरा भुज वरा लंक लोड़ै
सुरग नो चंद्रमा वदन पर पेखियै
चली वर अंगना सगत-मोड़ै
आय जब रुकमणी द्वार ठाडी भयी
असुर सिसपाळ पठियै अपूठै
कृष्ण पण धारि कै जुगल जोड़ी वणी
पदम कै स्वामी कूं नाथ तूठै