हीयो हरखै मन हंसै मिलसी आज मुरारि
सूरज किरण संभाळती दीनो अरघ कंवारि
मौतीयन का आखा करूं वीरा ! म्हांनै कृष्ण मिलाय
विछड़ी हिरणी तड़फड़ै चहुं दिस जोवै माग
हिवड़ो हुळसै, मन हंसै मिलसी दीनानाथ
धीरज कर बाई रुकमण ! हरिजी नेड़ा जाण
घड़ी दोय कै चार में कृष्ण मिलैगा आय
हरियो आवत देखकर लागी रिख रै पाय